राजभाषा हिंदी के कार्यान्‍वयन में गृह पत्रिका का महत्‍व

राजभाषा में गृह पत्रिका कैसे प्रकाशित करना और उससे लाभ

राजभाषा हिंदी के कार्यान्‍वयन में गृह पत्रिका का महत्‍व
डॉ.ए.वेंकटेश्‍वर राव
उप महाप्रबंधक (राजभाषा)
आंचलिक कार्यालय (उत्‍तर) नोएडा
सरकारी कार्यालयों में गृह पत्रिका प्राकशन का एक महत्‍वपूर्ण उद्देश्‍य और भूमिका होती है। गृह पत्रिका मुख्‍य रूप से कार्यालय की गतिविधियों को दर्शाती है। यदि यह राजभाषा से संबंधित हो तो कार्यालय में राजभाषा हिंदी से संबंधित गतिविधियों को अधिक महत्‍व दिया जाता है। गृह पत्रिका की भाषा कोई भी एक भाषा या बहु भाषा भी हो सकती है। राजभाषा गृह पत्रिका होने से बहु भाषा हो सकती है और इसमें अधिकतम हिंदी भाषा को महत्‍व देना है। इसीप्रकार अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं के लेख इत्‍यादि भी शामिल किया जा सकता है।
गृह पत्रिका किसी भी कार्यालय, विभाग या संस्था की आंतरिक पत्रिका होती है, जो कर्मचारियों की रचनात्मक अभिव्यक्ति, विचारों और अनुभवों को मंच प्रदान करती है। यह केवल साहित्यिक लेखन तक सीमित न होकर राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम भी है। गृह पत्रिका के माध्यम से कर्मचारियों को हिंदी में लेखन का अवसर मिलता है, जिससे उनमें हिंदी के प्रयोग के प्रति आत्मविश्वास बढ़ता है।
राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन में गृह पत्रिका की भूमिका बहुआयामी है। सबसे पहले, यह कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों के अतिरिक्त हिंदी में सोचने और लिखने के लिए प्रेरित करती है। जब कर्मचारी लेख, निबंध, संस्मरण, कविता या अनुभव हिंदी में लिखते हैं, तो उनका भाषा ज्ञान स्वाभाविक रूप से विकसित होता है। यह अभ्यास आगे चलकर फाइल कार्य, टिप्पणियाँ और पत्राचार हिंदी में करने में सहायक सिद्ध होता है।
गृह पत्रिका राजभाषा संबंधी नीतियों, नियमों और उपलब्धियों के प्रचार का भी प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से राजभाषा अधिनियम, नियम, वार्षिक कार्यक्रम, हिंदी पखवाड़े की गतिविधियाँ तथा उपलब्धियों की जानकारी सरल भाषा में सभी तक पहुँचाई जा सकती है। इससे कर्मचारियों में राजभाषा के प्रति जागरूकता और रुचि उत्पन्न होती है।
गृह पत्रिका प्रकाशन से पहले निम्‍नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए
1. पठन-संस्कृति का विकास और विषयगत ज्ञान: पत्रिका के प्रकाशन अथवा उसमें लेखन से पूर्व विभिन्न पत्रिकाओं को पढ़ने की आदत विकसित की जानी चाहिए, जिससे लेखकों को विषय संबंधी ज्ञान प्राप्त हो सके और उनकी लेखन क्षमता में वृद्धि हो।
2. संपादकीय की भूमिका एवं मौलिक लेखन को प्रोत्साहन: पत्रिका का संपादकीय भाग उसका एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंश होता है। पत्रिका में प्रकाशित किए जाने वाले विषय विवाद-रहित, सकारात्मक तथा सहज भाषा में होने चाहिए। कार्मिकों को वेबसाइट आदि से सामग्री की नकल (कॉपी) करने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करते हुए स्वयं मौलिक लेखन के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इस विषय पर लेखन कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, हिंदी में ज्ञानवर्धन हेतु विभिन्न विषयों पर कार्मिकों को अवगत कराना आवश्यक है।
3. राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में गृह पत्रिका: गृह पत्रिका के माध्यम से राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। पत्रिका में प्रकाशित लेख, टिप्पणियाँ एवं अनुभव कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग के लिए प्रेरित करते हैं तथा उनमें भाषा के प्रति आत्मविश्वास उत्पन्न करते हैं।
4. कार्मिक सहभागिता एवं प्रोत्साहन की व्यवस्था: पत्रिका के प्रकाशन में सभी स्तरों के कार्मिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे संगठन में समन्वय एवं संवाद को प्रोत्साहन मिले। साथ ही, उत्कृष्ट लेखन के लिए कार्मिकों को प्रशस्ति-पत्र अथवा पुरस्कार देकर सम्मानित करने से हिंदी लेखन के प्रति रुचि और सहभागिता में वृद्धि होती है।
इसके अतिरिक्त, गृह पत्रिका कर्मचारियों की सहभागिता और आपसी जुड़ाव को भी सुदृढ़ करती है। विभिन्न अनुभागों और स्तरों के कर्मचारी जब अपने विचार साझा करते हैं, तो संगठनात्मक एकता और संवाद को बढ़ावा मिलता है। हिंदी के माध्यम से अभिव्यक्ति, भाषा के प्रति अपनत्व की भावना को मजबूत करती है और यह भावना राजभाषा कार्यान्वयन के लिए आवश्यक है।
गृह पत्रिका रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में भी योगदान देती है। इसमें प्रकाशित लेख भारतीय मूल्यों, परंपराओं और सामाजिक विषयों को उजागर करते हैं, जिससे भाषा के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना भी सशक्त होती है।
गृह पत्रिका राजभाषा हिंदी के कार्यान्वयन का एक प्रभावी, सहज और प्रेरक साधन है। यह न केवल हिंदी के प्रयोग को बढ़ाती है, बल्कि कर्मचारियों को राजभाषा नीति का सक्रिय सहभागी बनाती है। यदि गृह पत्रिका का नियमित प्रकाशन और प्रभावी संपादन किया जाए, तो यह राजभाषा हिंदी को व्यवहारिक और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वर्ष में दो गृह पत्रिकाओं का नियमित प्रकाशन करने से राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित पुरस्कार प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। गृह पत्रिकाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजभाषा विभाग द्वारा पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। राजभाषा गृह पत्रिकाओं की गुणवत्ता एवं उच्च स्तर सुनिश्चित करने हेतु राजभाषा विभाग द्वारा जारी पत्र संख्या 11014/34/2014–राभा (प्र), दिनांक 21.01.2015 का अवलोकन किया जा सकता है।

रचना (PDF)


डाउनलोड करें
← वापस रचनाओं की सूची में